गुंजन कुमार की प्रस्तुति:
भारत में मिडिया को देश का स्तम्ब मन जाता है। अक्सर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा होती रहती है। ये
चर्चा होना भी चाहिए, क्योकि भारतीय सविंधान में मिडिया को छठा
स्तम्ब का स्थान प्राप्त है। 3 मई को मनाए जाने
वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर भारत में भी प्रेस की स्वतंत्रता पर बातचीत होना लाजिमी सी बात तो बनती ही है।
भारत में प्रेस की स्वतंत्रता भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 में भारतीयों को दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी
के मूल अधिकार से सुनिश्चित होती है। विश्व स्तर
पर प्रेस की आजादी को सम्मान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया, जिसे विश्व प्रेस दिवस के रूप में भी
जाना जाता है।
यूनेस्को द्वारा 1997 से हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस
फ्रीडम प्राइज भी दिया जाता है। यह पुरस्कार उस व्यक्ति
अथवा संस्थान को दिया जाता है जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उल्लेखनीय कार्य किया हो।
वर्ष 2017 का गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम पुरस्कार “इरीट्रिया” के “दावित ईसाक” को दिया गया। आपको बतादें कि 1997 से अब तक भारत के किसी भी पत्रकार को यह पुरस्कार प्राप्त करने
का सौभाग्य नहीं मिला, और नहीं मिलने की एक बड़ी वजह को कई वरिष्ठ पत्रकार पश्चिम
और भारत में पत्रकारिता के मानदंडों में
अंतर को बताते हैं।
बिहार के मधुबनी जिला के वरिष्ठ पत्रकार धनंजय कुमार धीरज व रेडियो, टेलीविजन और दैनिक
पत्रिका में काम कर चुके भोजपुरी फ़िल्म के
सहायक निर्देशक सह पीआरओ विक्रम भगत नागवंशी ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता में हमेशा विचार हावी होता है। जबकि
पश्चिम में ऐसा नहीं है, उधर तथ्यात्मकता पर जोर दिया जाता है।
इससे कहीं न कहीं हमारे पत्रकारिता के
स्तर में कमी तो आती ही है। इसके अलावा भारतीय पत्रकारों में पुरस्कारों के प्रति जागरूकता की भी
काफी कमी है, वे इसके लिए प्रयासरत नहीं रहते है। जिसका फलस्वरूप है कि भारत
में 1997 से अभी तक किसी पत्रकार को गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम पुरस्कार नहीं मिल पाया
है।
दावित
ईसाक को 30 मार्च 2017 को 2017
के
यूनेस्को/ गिलर्मो कैनो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज
देने के लिए चुना गया था। ईसाक को उनकी हिम्मत,
प्रतिरोध
और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता हेतु इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया था।
इस
पत्रकार को सितंबर 2001 में हुई मीडिया के
निष्कासन के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
उनका वर्तमान स्थान अज्ञात है। पुरस्कार 3 मई 2017 को,
विश्व
प्रेस स्वतंत्रता दिवस, के मौके पर दिया
जाएगा। समारोह की मेजबानी जकार्ता, इंडोनेशिया करेगा।
दावित
ईसाक कौन है?
• वे स्वीडिश– एरिट्रान
नाटककार, पत्रकार और लेखक हैं।
• वे वर्ष 1987 में स्वीडन चले गए, जहां बाद में वे वहां के नागरिक बने और
आत्म– निर्वासित निर्वासन में चले गए।
• वे वर्ष 2001 से इरित्रिया के जेल में बिना किसी
ट्रायल के बंद हैं और इरित्रिया की सरकार उन्हें गद्दार मानती है।
• उन्हें एमनेस्टी
इंटरनेशनल ने विवेकपूर्ण कैदी माना है और उनके तत्काल एवं बिना शर्त रिहाई की मांग
की है।
क्या
है यूनेस्को/ गिलर्मो कैनो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज?
• यूनेस्को/ गिलर्मो
कैनो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज की शुरुआत यूनेस्को के एग्जीक्युटिव बोर्ड ने 1997 में की थी।
• यह पुरस्कार उस
व्यक्ति, संगठन या संस्थान को
दिया जाता है जिसने दुनिया में कहीं भी
प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा और प्रोमोशन में असाधारण योगदान दिया हो और खासकर तब जब इसे
खतरनाक स्थिति में प्राप्त किया गया हो।
• इस पुरस्कार का नाम
गिलर्मो कैना इस्जा, कोलंबियाई पत्रकार
जिनकी 1986 में हत्या कर दी गई
थी, के सम्मान में रखा
गया है।



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