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थाना में अगर FIR दर्ज नहीं करें, तो करें ये काम

अगर थाना प्रमुख आपकी शिकायत की एफआईआर दर्ज नहीं करता है या मना करता है, तो आप अपनी शिकायत रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से क्षेत्रीय पुलिस उपायुक्त को भेज सकते हैं। उपायुक्त आपकी शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर सकता है। इसके अलावा एफआईआर नहीं दर्ज किए जाने की स्थिति में आप अपने क्षेत्र के मैजिस्ट्रेट के पास पुलिस को दिशा-निर्देश के लिए कंप्लेंट पिटीशन दायर कर सकते हैं कि 24 घंटे के भीतर केस दर्ज कर आपको एफआईआर की कॉपी उपलब्ध करवाए। मैजिस्ट्रेट के आदेश पर भी पुलिस अधिकारी समय पर शिकायत दर्ज नहीं करता है या फिर एफआईआर की कॉपी उपल्बध नहीं करवाता है, तो उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और जेल भी हो सकती है।
●याद रखिये FIR लिखने का 9k फार्मूला
हम सभी को कभी न कभी FIR लिखाना ही पड़ जाता है चाहे खुद के लिये या किसी जानने वाले के लिये। अक्सर लोगो की शिकायत होती है कि उनकी FIR थाने में नहीं लिखी गई, या फिर मजिस्ट्रेट के यहाँ FIR के लिये किया गया आवेदन निरस्त हो गया। इसके तो कई कारण होते है किंतु एक कारण ये भी होता है की आपके लिखने का तरीका गलत हो। FIR को कम से कम शब्दों में स्पष्ट और पूरे मामले को लिखना चाहिये क्योंकि न्यायालय में आपका केस इसी आधार पर चलता है । आसान भाषा में FIR को लिखने का तरीका बता रहा हूँ क्योंकि कई बार पढ़े लिखे लोग भी FIR लिखने में गलती कर देते है।
सबसे पहले आप एक सादा पेपर ले और उसपर 1 से 9 तक नंबर लिख ले, फिर उन सब के सामने K लिख ले, बस हो गया आपका FIR ।
9K का मतलब क्या होता है आप नीचे पढ़ेंगे तो स्वतः स्पष्ट हो जायेगा।
(1) कब (तारीख और समय)- FIR में आप घटना के समय और तारीख की जानकारी लिखे ।
(2) कहा (जगह)- घटना कहाँ पे हुई इसकी जानकारी दे।
(3) किसने - अपराध किस ब्यक्ति ने किया ( ज्ञात या अज्ञात) एक या अनेक ब्यक्ति उसका नाम पता आदि लिखे ।
(4) किसको - किस के साथ अपराध किया गया एक पीड़ित है या अनेक उनसब का नाम व पता।
(5) किसलिये - यह एक मुख्य विषय होता है इसी से यह पता चलता है की कोई कार्य अपराध है या पुरस्कार देने के लायक कार्य है, इसको निम्न प्रकार समझ सकते हैं-
(अ) क एक ब्यक्ति ख पर गोली चला देता है और ख की मृत्यु हो जाती है, क यहाँ पर दोषी होगा।
(ब) क एक ब्यक्ति ख पर अपनी पिस्तौल तान देता है और ख अपने बचाव में क पर गोली चला देता है जिससे क की मृत्यु हो जाती है। ख हत्या का दोषी नहीं है क्योंकि अपनी आत्मरक्षा करते हुए अगर आप किसी की जान भी ले लेते है तो आप दोषी नहीं होंगे।
(स) क अपनी कार से ख तो टक्कर मार देता है और ख की मृत्यु हो जाती है, क हत्या का दोषी नहीं है बल्कि उसपर दुर्घटना का केस चलेगा और उसके हिसाब से दण्ड मिलेगा।
(द) क एक पुलिस कर्मी है और वह आतंकवादी संगठन के मुठभेड़ में एक या कई आतंकवादीयो को मार देता है। क हत्या का दोषी नहीं होगा बल्कि उसे पुरस्कार दिया जायेगा।
इससे यह स्पष्ट होता है की कोई भी कार्य तब तक अपराध नहीं है जब तक की दुराशय से न किया गया हो।
(6) किसके सामने ( गवाह)- अगर घटना के समय कोई मौजूद हो तो उनकी जानकारी अवश्य देनी चाहिये।
(7) किससे ( हथियार) - अपराध करने के लिए किन हथियार का प्रयोग किया गया ( पिस्तौल , डंडे, रॉड, चैन , हॉकी, ईट। अगर कोई धोखाधड़ी का मामला है तो आप ( स्टाम्प पेपर, लेटरहेड, इंटरनेट , मोबाइल, आदि,) जानकारी जरूर प्रदान करे।
(8) किस प्रकार - क्या प्रकरण अपनाया गया अपराध् करने के लिये उसको लिखे।
(9) क्या किया ( अपराध)- इनसभी को मिलकर क्या किया गया जो की अपराध होता है उसको लिखे।
इस प्रकार आप सब आसानी से FIR को लिख सकते है।
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