बेनीपट्टी(मधुबनी): राज्य सरकार व बिहार इंटरमेडियेट शिक्षा परिषद की दोषपूर्ण नीति के कारण इस बार मंगलवार को जाररी हुये इंटर के सभी संकायों के परीक्षा परिणाम असंतोषजनक रहा. अनुमंडल प्रक्षेत्र के डा. एनसी कॉलेज बेनीपट्टी, सुरसरि चंद्रमुखी महिला कॉलेज बेनीपट्टी, पीडीसीपी कॉलेज बसैठ, आरएनजे कॉलेज मधवापुर, सीपीपी कॉलेज हिसार बौरहर सहित अन्य कॉलेज में अध्य्यनरत छात्रों का परीक्षा परिणाम बेहद ही असंतोषजनक रहा. जबकि अन्य वर्षों के अलावे पिछले वर्ष भी अनुमंडल प्रक्षेत्र के पीडीसीपी कॉलेज के एक छात्रा सहित कुल दो छात्रों ने राज्य के टॉप टेन की सूची में शामिल होकर उल्लेखनीय परीक्षा परिणाम हासिल किया था. इस साल अनुमंडल की एक भी छात्र या छात्रायें राज्य के टॉप टेन की सूची में शामिल नही हो सका. परीक्षा परिणाम को लेकर कई महाविद्यालयों के प्राचार्य व शिक्षाविदों ने विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
मुख्यालय के डा. एनसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. भवानंद झा ने कहा कि हड़ताल की स्थिति में अनुभवहीन शिक्षकों से कॉपी का मूल्यांकन करवाया गया. जिनमें कई शिक्षक मध्य विद्यालयों के थे. ऐसे शिक्षकों से इंटर स्तर के छात्रों की मूल्यांकन कर छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया, लिहाजा परीक्षा परिणाम बेहद ही असंतोषजनक रहा. जो बेहद ही दूर्भाग्यपूर्ण है.
सुरसरि चंद्रमुखी महिला महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कमलेश्वर ठाकुर ने कहा कि अप्रशिक्षित शिक्षकों से कॉपी मूल्यांकन करवाकर सरकार व इंटर कॉंसिल ने छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया. इस तरह का परीक्षा परिणाम शायद ही अनुमंडल क्षेत्र में रहता था. पिछले बार जहां हमारे महाविद्यालय के परीक्षा परिणाम 70 फिसदी रहा था, वहीं इस बार सिमटकर 24 फिसदी पर आ गया. खासकर संगीत के छात्रों का परिणाम निराशाजनक रहा है.
पीडीसीपी कॉलेज बसैठ के प्रभारी प्राचार्य प्रो. मदन कुमार कर्ण ने कहा कि हर साल बेहतर परीक्षा परिणाम आता था, पर इस बार राज्य सरकार की गलत नीति का शिकार होने के कारण अधिकांश महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम खड़ाब रहा है. अनुमंडल के एक भी छात्र राज्य के टॉप टेन की सूची में शामिल नही हो सका, जबकि बेनीपट्टी अनुमंडल शिक्षा व परीक्षा परिणाम के क्षेत्र में हर साल अव्वल स्थान प्राप्त करता रहा है.
विज्ञान के प्राध्यापक प्रो. अमरेंद्र कुमार ने कहा कि प्राथमिक व मध्य विद्यालय के शिक्षकों से इंटर स्तर के छात्रों को कॉपी मूल्यांकन कराये जाने के कारण अधिकांश महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहा है. बच्चों के मेघा के साथ अन्याय हुआ है. कम अंक के कारण छात्रों का नामांकन अब अन्य प्रदेशों या उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थान में नही हो सकेगा.
संगीत के प्राध्यापक प्रो. तारानंद ठाकुर कहते हैं कि राज्य में संगीत के बहुत ही कम शिक्षक हैं और हड़ताल की स्थिति में अनुभवहीन शिक्षकों के द्वारा कॉपी की जांच करवाकर बच्चों के जीवन के साथ मजाक उड़ाया गया है.
बेनीपट्टी एसडीपीओ निर्मला कुमारी ने कहा कि परीक्षा परिणाम से छात्र छात्राओं को हतोत्साहित नही होना चाहिये. बल्कि दोगुणे उत्साह व लगन से परीक्षा की तैयारी करनी चाहिये. अन्य प्रदेशों में प्रतिस्पर्द्धाओं का सामना करने के लिये बच्चों को परिश्रमी बनने की आवश्यकता है. हमेशा सकारात्मक सोच से ही जीवन के अहम लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है.
मुख्यालय के डा. एनसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. भवानंद झा ने कहा कि हड़ताल की स्थिति में अनुभवहीन शिक्षकों से कॉपी का मूल्यांकन करवाया गया. जिनमें कई शिक्षक मध्य विद्यालयों के थे. ऐसे शिक्षकों से इंटर स्तर के छात्रों की मूल्यांकन कर छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया, लिहाजा परीक्षा परिणाम बेहद ही असंतोषजनक रहा. जो बेहद ही दूर्भाग्यपूर्ण है.
सुरसरि चंद्रमुखी महिला महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कमलेश्वर ठाकुर ने कहा कि अप्रशिक्षित शिक्षकों से कॉपी मूल्यांकन करवाकर सरकार व इंटर कॉंसिल ने छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया. इस तरह का परीक्षा परिणाम शायद ही अनुमंडल क्षेत्र में रहता था. पिछले बार जहां हमारे महाविद्यालय के परीक्षा परिणाम 70 फिसदी रहा था, वहीं इस बार सिमटकर 24 फिसदी पर आ गया. खासकर संगीत के छात्रों का परिणाम निराशाजनक रहा है.
पीडीसीपी कॉलेज बसैठ के प्रभारी प्राचार्य प्रो. मदन कुमार कर्ण ने कहा कि हर साल बेहतर परीक्षा परिणाम आता था, पर इस बार राज्य सरकार की गलत नीति का शिकार होने के कारण अधिकांश महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम खड़ाब रहा है. अनुमंडल के एक भी छात्र राज्य के टॉप टेन की सूची में शामिल नही हो सका, जबकि बेनीपट्टी अनुमंडल शिक्षा व परीक्षा परिणाम के क्षेत्र में हर साल अव्वल स्थान प्राप्त करता रहा है.
विज्ञान के प्राध्यापक प्रो. अमरेंद्र कुमार ने कहा कि प्राथमिक व मध्य विद्यालय के शिक्षकों से इंटर स्तर के छात्रों को कॉपी मूल्यांकन कराये जाने के कारण अधिकांश महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहा है. बच्चों के मेघा के साथ अन्याय हुआ है. कम अंक के कारण छात्रों का नामांकन अब अन्य प्रदेशों या उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थान में नही हो सकेगा.
संगीत के प्राध्यापक प्रो. तारानंद ठाकुर कहते हैं कि राज्य में संगीत के बहुत ही कम शिक्षक हैं और हड़ताल की स्थिति में अनुभवहीन शिक्षकों के द्वारा कॉपी की जांच करवाकर बच्चों के जीवन के साथ मजाक उड़ाया गया है.
बेनीपट्टी एसडीपीओ निर्मला कुमारी ने कहा कि परीक्षा परिणाम से छात्र छात्राओं को हतोत्साहित नही होना चाहिये. बल्कि दोगुणे उत्साह व लगन से परीक्षा की तैयारी करनी चाहिये. अन्य प्रदेशों में प्रतिस्पर्द्धाओं का सामना करने के लिये बच्चों को परिश्रमी बनने की आवश्यकता है. हमेशा सकारात्मक सोच से ही जीवन के अहम लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है.


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