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रामायणकाल से जुड़ी, गिरिजा स्थान आज भी है उपेक्षित

मिथिला की ऐतिहासिक धरोहर तीर्थ स्थल कल्याणेश्वर व गिरिजा महारानी स्थान फुलहर को सरकार से विकास की दरकार है। रामायण काल से जोड़ने वाली यह मिथिला की ऐतिहासिक धरोहर पुरी तरह उपेक्षित है। बिहार सरकार द्वारा पर्यटन स्थल घोषित होने के बावजूद सुबे की किसी भी सरकार ने इस स्थल का विकास करना उचित नहीं समझा। यह एक ऐसा स्थल है जहां हर रोज भारत नेपाल के हजारों श्रद्धालू दर्शन करने आते है। विश्व प्रसिद्ध होने के कारण श्रद्धालूओें के अलावे बड़े-बड़े नेता व आलाधिकारी भी एक बार जरुर इस स्थल पर अपना माथा टेकने पहुंचते है, लेकिन किसी ने इसके विकास के दिशा  में  पहल नहीं किया है। जब भी राजनीतिक दल के लोग चुनाव लड़ते है, तो इन तीर्थ स्थलों के विकास के लंबे-लंबे दावे व वायदे करते है और चुनाव जीतने के बाद मात्र दार्शनिक बन कर रह जाते है। मिथिला के एक यही स्थल नहीं बल्कि शायद जीतने भी तीर्थ स्थल है, सभी को उपेक्षित रखा गया है। आखिर मिथिला के साथ सौतेलापन का व्यवहार क्यों हो रहा है, जो अब लोगों के जेहन में मात्र सवाल बन कर रह गया है।
क्या है गिरिजा और कल्याणेश्वर स्थल का इतिहास
रामायणकाल में जब मर्यादापूरुषोत्तम श्रीराम, लक्षमण अपने परम्पूज्य गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर मिथिला नरेश महाराज जनक के निमंत्रण में जाने के दौरान विश्राम के क्रम में कल्याणेश्वर में पुजा अर्चना के उपरांत ही जनकपुर के लिए प्रस्थान किए थे। वहीं फुलहर स्थित गिरजा महारानी स्थान में जनकनंदनी माता जानकी ने श्रीराम से विवाह हेतु महारानी गिरजा से वरदान मांगी थी तथा फुलहर स्थित बागतराग फुलवारी में माता जानकी फुल लोढ़ने आया करती थी। जहां माता जानकी का श्रीराम से पहला मिलन इसी फुलवारी में हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार रामायण में इन बातों की चर्चाएं भी है। तब से इन स्थलों पर पुजा अर्चना की जाती है, लेकिन इन महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों को उपेक्षित रखना बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। 
क्या कहते है लोग
सरकार द्वारा इन स्थलों को उपेक्षित रखे जाने से स्थानीय लोगों में निराशा  के साथ साथ आक्रोश भी व्याप्त है। जो उपचुनाव के परिणाम को  दर्शाता है। फुलहर निवासी रामकृपाल सिंह, चंदन गिरी, मनीष सिंह, जीवन भगत, हरिश्चंद्र यादव, रामप्रबेाध यादव, छोटे साह सहित कई लोगों ने बताया कि जब सरकार द्वारा इन स्थलों का पर्यटन में घोषणा हुआ। हम लोगों में एक ख़ुशी का माहौल छा गया। घोषणा तो हो गई, अधिकारी भी कई बार निरीक्षण करने आएं, लेकिन आजतक वह कागजों पर ही सीमट कर रह गया। जिलाअधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री तक हमलोगों ने पत्र लिखा, पर आजतक हमें कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इतना ही नहीं पंचायत समिति के बैठक में भी प्रस्ताव डाला गया। आखिर सरकार की मंसा इस स्थल को लेकर साफ क्यों नहीं है। इन स्थलों को सिर्फ चुनाव के ही समय में भुनाया क्यों जाता है। यह मिथिला का एक धरोहर है। जिसे सरकार द्वारा संरक्षित किया जाना चाहिए। लोगों ने यह भी कहा कि बोधगया पर तो सरकार का पुरा ध्यान है, लेकिन हमारे साथ सौतेलापन व्यवहार क्यों हो रहा है। जिस पर सरकार को जबाब देना चाहिए।
क्या कहते है विधायक
स्थानीय विधायक शुधान्शु शेखर  ने कहा कि हम विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएंगे, लेकिन हम विपक्ष में होने के कारण इस पर कुछ खास पहल नहीं कर पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कल्याणेश्वर व फुलहर हमारे प्राथमिकता में सबसे उपर है। हम इसके विकास के लिए पुरी प्रयास करेंगे।
क्या कहते है अधिकारी
बेनीपट्टी एसडीएम राजेश परिमल ने बताया कि इन पर्यटन स्थलों के समग्र विकास हेतु विभाग को लिखा गया है, दिशा निर्देश मिलते ही कार्रवाई होगी।
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