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उपेक्षा का शिकार धार्मिक स्थल गिरिजा स्थान

मधुबनी: हरलाखी प्रखंड मुख्यालय से दस किमी दूरी पर अवस्थित लाखों हिन्दु धर्मावलंबीयों का आस्था का केन्द्र गिरिजा स्थान फुलहर प्रशासनिक उदासीनता का शिकार बना हुआ है। यह स्थान मुलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जहां दूर दराज के लोग से लेकर पड़ोसी देश नेपाल से लाखों श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए आते हैं। समय समय पर दूसरे राज्य से श्रद्धालुओं का आगमन भी यहां होता रहता है। लेकिन उन सबों के ठहरने के लिए यहां धर्मशाला नहीं होने के कारण चाह कर भी पर्यटक कुछ दिनों तक नही ठहर पाते हैं। पूर्व में यहां नेपाल के कई मंत्री भी माता के दर्शन को पधार चुके हैं। रामायण में चर्चा है कि गुरु वशिष्ठ के साथ रामचन्द्र जी जनकपुर सीता स्वयंवर में भाग लेने के लिए अयोध्या से आ रहे थे तब गिरिजा स्थान फुलहर में अवस्थित राजा जनक के बाग में माता जानकी से उनक प्रथम मिलन हुआ था। यहां के ग्रामीणों के द्वारा दिए गए दान से ही यहां पर आए अतिथियों का सेवा सत्कार किया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में यहां के विकास के लिए राशि आवंटित की गई थी जिसमें ठेकेदार के द्वारा केवल पोखर की उढ़ाही के साथ घाट व चहारदिवारी का निर्माण किया गया है। यहां पर स्वच्छ जल शौचालय चहारदिवारी धर्मशाला का भारी अभाव है। मंदिर के पुजारी उमेश गिरी ने बताया कि चढ़ावे के राशि से ही थोड़ा बहुत विकास ग्रामीणों के द्वारा किया जाता रहा है यदि शीघ्र इस धार्मिक स्थल के उत्थान के बारे में सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो पर्यटन के दृष्टि से यह स्थान काफी पिछड़ जाएगा।
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