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सिद्धिपीठ उचैठ स्थान में लगा चैती दूर्गा पूजा का भीड़

फोटो: बेनीपट्टी के उच्चैठ स्थित मां छिन्नमस्तिका और मंदीर में जलाभिषेक के लिए उमड़ी भीड़।
बेनीपट्टी (मधुबनी): अनुमंडल क्षेत्र के कई जगहों पर हर्षोंल्लासपूर्वक चैती दूर्गा पूजनोत्सव मनाया जा रहा है. उच्चैठ, बेहटा काली स्थान, बसैठ, अरेर, साहरघाट और बलवा समेत आधे दर्जन से अधिक स्थानों पर पूजनोत्सव समारोह के साथ मनाया जा रहा है. पूजा स्थलों पर साधकों के द्वारा दूर्गा शप्तशती व दूर्गा चालिसा का निष्ठापूर्वक पाठ किया जा रहा है. वहीं शक्ति व बीज मंत्र आदि का जाप कर साधक अपनी तंत्र व मंत्र साधना में लीन हो चुके हैं. चारों तरफ भगवती के बज रहे गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है. एक बार फिर से इस अवसर पर पूरा क्षेत्र सर्व मंगल मांग्लये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्रयंबिके गौंड़ी नारायणि नमोस्तुते व या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरुपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः की प्रतिध्वनि वातावरण में गूंज रहा है. सुबह और संध्याकालीन महाआरती में सैकड़ों श्रद्धालू भाग ले रहे हैं और संध्या के समय तो खाकर कन्याओं के द्वारा दीप प्रज्वलित किये जाने से पूरा मंदीर परिसर जगमगाता प्रतीत हो रहा है. विश्वप्रसिद्ध छिन्नमस्तिका देवी के दर्शन के लिए उच्चैठ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. बता दें कि सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती स्थल में चारों नवरात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते है. चैती दूर्गा पूजनोत्सव प्रारंभ होते ही सुबह से ही यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगतवी का दर्शन व जलापर्ण कर रहे है. बताते चलें कि मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूरी पर उच्चैठ स्थित पश्चिम उतर कोने पर अवस्थित मां छिन्नमस्तिका मंदीर अवस्थित है, जहां संस्कृत के महाकवि कालिदास को विद्वता का वरदान मिला था. जबकि कालिदास महामूर्ख माने जाने के कारण पत्नी पद्मावती से प्रताड़ित होकर यहां शरण ली थी और उनके भक्तिभाव का परिणाम था कि मां साक्षात दर्शन देकर उनको शापमुक्त की थी और दुनियां में महामूर्ख कालिया महाकवि कालिदास के नाम से विख्यात हुए थे. जनश्रुति के अनुसार यह 51 शक्तिपीठों में से एक है. जिसके फलस्वरुप नवरात्र के अलावे अन्य दिनों में भी भारत के कई राज्यों व परोसी देश के नेपाल के साथ ही अन्य प्रदेश व देशों के लोग भी आकर मां की पूजा अर्चना करते हैं. जानकारी के अनुसार नवरात्रा में प. बंगाल, झारखंड व नेपाल से हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते है. बताया जाता है कि उच्चैठ भगवती के दर से आज तक कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटा है. भगवती सब की मुरादें पूरी कर देती है. जिससे लोगों की आस्था निरंतर परवान चढ़ती रहती है. ज्ञात हो कि ज्यों-ज्यों नवरात्र अंतिम पडाव की ओर बठता जाता है, त्यों त्यों यहां श्रद्धालूओं की भीड़ उमड़ने लगती है.
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