बेनीपट्टी(मधुबनी): बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (एटक) के तत्वाधान में विभिन्न मांगों को लेकर 20 अप्रैल से को पटना में किया जा चुका है। पटना के डाक बंगला चौराहे को तकरीबन चार घंटे से अधिक तक जाम कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकार के विरुद्ध नारेबाजी कर अपना रोष प्रकट कर चुकी है, बावजूद सरकार उनकी मांगों के प्रति उदासीन रवैया अपना रखी है। इस बाबत जिला महासचिव शबनम झा ने प्रेस बयान जारी करते हुए सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को सरकार की कुंभकरणी निंद्रा नही भंग हो सकी है। सरकार की निंद्रा भंग करने के लिए चरणबद्ध आंदोलन के साथ ही अब आर पार की लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र संचालन करने के एवज में सेविका और सहायिकाओं को जो मानदेय दिया जा रहा है, वह न्यूनतम मजदूरी दर से काफी कम है। एक तरफ सरकार जहां महिला सशक्तिकरण की बात कहती है, वहीं दूसरी ओर सेविका और सहायिकाओं का शोषण कर रही है। सेविकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, कम से कम 18 हजार का मासिक मानदेय दिये जाने, महिला पर्यवेक्षिका के पद पर परियोजना में कार्यरत सेविकाओं और सेविकाओं के पद पर सहायिकाओं को सीधी नियुक्त किये जाने, लंबित नियमितिकरण को शीघ्र लागू करने, 45 वें श्रम सममेलन की सिफारिशों को लागू करने, गारंटीशुदा पेंशन देने व ग्रेज्यूटी लाभ समेत अन्य मांगों को लेकर चरणबद्ध धरना प्रदर्शन व अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगा। वहीं उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा आंदोलन को कूंद करने की साजिश रची जा सकती है। सेविकाये और सहायिकायें मजबूती के साथ अपने हक के लिये हड़ताल पर बनीं रहें। किसी तरह के बहकावे में नही आने की सार्वजनिक अपील करते हुए आंदोलन को सफल बनाने का आग्रह सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से की है।
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/ हक और अधिकार के लिये जारी रहेगा आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (एटक) का हड़ताल
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