काठमांडू(नेपाल): नेपाल के निवर्तमान प्रधानमंत्री प्रचंड अपने दायित्व का निर्वहन नही कर सके। प्रचंड ने नेपाल की बहुत बड़ी समस्या को बिना सुलझाये हुये अपनी इस्तीफा पेश कर दी है। क्योंकि स्थानीय चुनावों के दूसरे चरण में 14 जून को मतदान होने जा रहा है । नेपाली कांग्रेस के शेर बहादुर देउबा को अगले सप्ताह कार्यालय में आने की उम्मीद है। नेपाल के नये प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउपा के आगे उन समस्या को सुलझाने की बहुत बड़ी चुनौती होगी। वयोवृद्ध नेता महंत ठाकुर की अगुवाई वाली नवगठित मधेशी पार्टी ‘राष्ट्रीय जनता पार्टी’ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनाव में तबतक भाग नहीं लेंगे जब तक कोई संशोधन नहीं होता। देउबा को कार्यभार संभालने के तुरंत बाद ही संविधान संसोधन के लिए गंभीर प्रयास करना होगा। जिसकी संभावना नहीं दिखती है। अगर संसोधन नही हुआ तो उन्हें चुनावों को स्थगित कर के आगे बढ़ाना होगा। अगर ऐसा नही हुआ तो देश की बहुत बड़ी शक्ति मधेशी शक्ति प्रमुख प्रक्रिया से बाहर बनी रह सकती है। उसके बाद ऐसी स्थित बन सकती है जो पहाड़ियों और मैदानी इलाकों के बीच विभाजन को और गहरा कर सकती है और फिर चुनाव की वैधता के बारे में भी सवाल उठ सकती है। मधेशियों द्वारा चुनाव में अवरोध किया जा सकता है। जो की फिर हिंसा का रूप ले सकती है। ऐसी परिदृश्य में भले ही राज्य चुनावों के माध्यम से ही आगे बढने की सोचती हो तो यह एक बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकती है। मधेश के युवा वर्ग में गुस्सा बरकरार है जो कि अलगाव सहित क्रांतिकारी पथ तलाश सकती है। जिसका परिणाम चुनाव स्थगित भी करना पड़ सकता है और देश में फिर अशांति आ जाएगी। अब सबकी नजर नेपाल के नये प्रधानमंत्री के उपर टीकी हुई है।
विक्रम भगत नागवंशी
संपर्क: 8678072643
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