हरलाखी(मधुबनी): बिहार बजट में मिथिला क्षेत्र के लिए कोई भी रोडमैप नहीं है। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हर बार के बिहार के बजट में पूर्व की भांति मिथिला क्षेत्र को बड़े पैमाने पर उपेक्षा की जाती रही है। जो बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। रोजगार के नाम पर सुबे में मात्र 5 बड़ी कंपनी है. जो कुल आबादी के सिर्फ 8 फिशदी लोगों को ही रोजगार मुहैया करा पाती है। बांकी के 92 फिशदी लोग प्रदेश से बाहर पलायन को मजबुर है। कहने के लिए बिहार में 70 फिशदी लोग जीविकोपार्जन कृषि पर निर्भर है, लेकिन सिर्फ 18 फिशदी लोगों का ही इससे पेट भरता है। जबकि इसमें सबसे बदतर हाल मिथिला क्षेत्र का है। अन्य राज्यों के अपेक्षा बिहार में 28 फिशदी लोन कम दिये जाते है। उक्त बातें प्रेस बयान जारी कर रालोसपा के राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता माधव आनंद ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि इन आंकड़ो में मिथिला क्षेत्र में एक भी एम्स, आईआईटी, आईआईएम, एयरपोर्ट, आईआईटी का स्थापना नहीं होना बिहार सरकार की मंशा साफ जाहिर करती है। एक सोंची समझी साजिश के तहत मिथला क्षेत्र को उपेक्षित रखा गया है। सरकार को मिथिला के विकास के लिए अपनी निति स्पष्ट करनी चाहिए। क्योंकि यहां न ही कोई डिग्री कालेज, समुचित स्वास्थ्य सुविधा ही उपलब्ध है। जबकि चुनाव के समय में मिथिला के विकास के लिये बिहार सरकार तमाम दावे करती है। कहां गयी सरकार के वो वादे तथा दावे, जिन्होंने मिथिला के भोली भाली जनता को ठगने का काम किया है।
विक्रम भगत नागवंशी
संपर्क: 8678072643


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