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| साहरघाट दुर्गा मंदिर स्थित माँ का प्रतिमा |
यूं तो कई लोंगो को मां की आरती में भाग लेने का मौका ही नही मिल पाता पर संध्याकालीन आरती के दौरान अधिकांश लोग अपना सभी आवश्यक काम छोडकर महाआरती में भाग लेना जरुरी समझते हैं. इस मंदीर के पूजारी पंडित सुबोध मिश्र ने बताया कि इस तरह यहा सब दिन संध्या के समय श्रद्धालू नांच नांच कर मां की आरती में भाग लेते देखे जा रहे हैं और यहा की मां वैष्णवी है. बलि प्रदान होने की प्रथा यहां नही रही है, जो माता वैष्णों देवी की यादें सहज ही ताजा कर देती है. प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दुर्गा मंदीर की स्थापना 18 मार्च 1987 में तत्कालीन साहरघाट थाना अध्यक्ष एसएन राय ने अपने नेतृत्व में जनसहयोग के माध्यम से करवाया था. तब से अब तक यहां थाना अध्यक्ष की अध्यक्षता में विधिवत पूजा अर्चना होती रही है व हजारों लोग माता दुर्गा से मनोवांक्षित वर पाकर अपना जीवन धन्य कर चुके हैं. पूजारी श्री मिश्र ने यह भी बताया कि दुर्गापूजा के लिये बनायी गयी स्थायी समिति के पदेन अध्यक्ष साहरघाट थानाध्यक्ष होते है. वहीं दूसरे तरफ शारदीय नवरा़त्र के प्रारंभ होते ही साहरघाट बाजार के आस पास उत्सवी माहौल बन चुका है. जय माता दी के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान बना हुआ है. कई लोग बताते हैं कि यहां हर मनोकामना पूरी होती है मां के दरबार में. बस सच्चे दिल से मां से मांगने की जरुरत है. आज तक इस दरबार से कोई भी खाली हाथ नही लौटा है.



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