जयनगर(मधुबनी): बिहार के मधुबनी जिले के सीमावर्ती क्षेत्र जयनगर में भारत- नेपाल सीमा से लगभग तीन किमी की दूरी पर मां दुर्गे की ये भव्य एवं सुंदर मंदिर स्थापित है। इस मंदिर की विधिवत् शुरुआत 2001 में पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पूजा-अर्चना के साथ किया था। इस मंदिर के बन जाने से जयनगर की धार्मिक महिमा और लोकप्रियता काफी बढ़ गयी। मंदिर की ऊंचाई 118 फीट है। संपूर्ण मिथिला क्षेत्र में इसकी काफी ख्याति है। दशहरा के अलावा अन्य दिनों में भी दूर-दूर से लोग आते हैं। इस मंदिर की वजह से धार्मिक पर्यटन और व्यापार में बढ़ोतरी हुई है। बिहार में सबसे ऊंचा दुर्गा मंदिर के नाम से यह मंदिर जाना जाता है। शक्तिपीठ से विख्यात मां दुर्गे की यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। बिहार के सामान्य ज्ञान की पुस्तकों में भी इसकी चर्चा होती है।
- नेपाल से भी पूजा करने आ रहे भक्त...
कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली चैती दुर्गा पूजा प्रारंभ हो गई है। शहर से लगा हुआ बस्ती पंचायत स्थित पौराणिक एवं ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर का मनमोहक दृश्य, श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। भक्तों की मुरादें पूरी करने वाली इस मंदिर में विधि विधान के साथ कलश स्थापना की जाती है। गुरुवार को मां दुर्गे की प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा होनी है। जय अंबे एवं जयमाता दी की जय-जयकार से पूरा वातावरण भक्तिमय में तबदील हो गया है। नेपाल समेत सूबे के विभिन्न क्षेत्रों से मां दुर्गे की दर्शन एवं पूजा अर्चना हेतु श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में पहुंच रहे हैं।
- प्रतिदिन होती है पूजा-अर्चना एवं आरती
- शंकराचार्य ने कराई थी प्राण प्रतिष्ठा


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