त्योहार
के मौके पर स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं को नदियों व तालाबों में
विसर्जन की परंपरा रही है। इससे नदियों व जलाशयों में होने वाले प्रदूषण पर
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चिंता जतायी है। बोर्ड ने इसको लेकर
गाइडलाइन जारी किया है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इससे संबंधित
पत्र मोतिहारी नगर परिषद को भेजा है। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी
हरिवीर गौतम ने बताया कि इसके अनुपालन के लिए सभी पूजा पंडालों को पत्र
भेजा जाएगा।
ये हैं गाइडलाइन: बोर्ड ने कहा है कि मूर्तियां प्राकृतिक सामग्री से
निर्मित होनी चाहिए। निर्माण में परंपरागत मृदा के उपयोग को बढ़ावा देना
चाहिए, न कि प्लास्टर ऑफ पेरिस आदि को। वहीं, मूर्तियों को रंगने में जल
में घुलने योग्य व अविषाक्त प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
इस दौरान, विषाक्त एवं गैर जैव निम्नीकरण योग्य रसायनिक रंगों का प्रयोग
प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। जारी गाइड लाइन के अनुसार पूजन सामग्री जैसे
पुष्प, सजावट की सामग्री (कागज एवं प्लास्टिक से निर्मित) आदि को विसर्जन
के पूर्व हटा देना चाहिए। बोर्ड ने मूर्ति विसर्जन क्षेत्र के चारो ओर एक
घेरा बनाने का सुझाव दिया है। सिंथेटिक लाइनर को पहले ही नीचे की तरफ लगा
देना चाहिए।
झीलों में विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेषों के साथ लाइनर को निकाला जा
सकता है। वहीं ठोस कणों को तह में बिठाने के लिए तालाब के जल में चूना
मिलाना चाहिए। बोर्ड ने नदियों में विसर्जन के लिए तट के साथ मिट्टी के
बांध वाले अस्थायी तालाब बनाने जाने का भी सुझाव दिया है। इस दौरान विसर्जन
के 48 घंटे के अंदर उक्त स्थल से मूर्तियों के अवशेषों सहित लाइनर को हटा
लिया जाना चाहिए।
निकायों को दिशा-निर्देश: प्रदूषण बोर्ड ने नगर निकायों को चिह्नित किये
गये विसर्जन स्थलों की जानकारी पूजा स्थलों को देने को कहा है। मूर्ति
विसर्जन स्थल पर पूजा में प्रयोग किये गये पुष्प, सजावट की वस्तुएं आदि ठोस
अपशिष्ट को जलाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)


0 comments:
Post a Comment