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हर्षोल्लास के संग मनाया गया भगवान चित्रगुप्त पूजा

मधुबनी: जिले में हर्षोल्लास के साथ कर्म और न्याय के देवता भगवान चित्रगुप्त का पूजनोत्सव मनाया गया। जिले में विभिन्न जगहों पर धूमधाम के साथ भगवान चित्रगुप्त की पूजा होती है। अंधराठाढ़ी प्रखंड के अंधरा में प्राचीन चित्रगुप्त पूजा समिति और सार्वजनिक पूजा समिति है। इन समितियों द्वारा भव्य चित्रगुप्त पूजा का आयोजन किया जाता है। इसके अलावे रतुपार, देवहार, सर्रा, नवनगर आदि गाँवो में भी भगवान चित्रगुप्त की मूर्ति स्थापित कर भव्य पूजा पंडाल बनाकर पूजा अर्चना की गयी। विभिन्न जगहों पर जगह जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है। ऐसी मान्यता है कि कायस्थ जाति के लोग चित्रगुप्त पूजा के दिन कलम दवात की पूजा करते है। पूजा के दिन कलम का प्रयोग करने से खुद को वर्जित रखते हैं। आज भी पूजा के अवसर पर कायस्थों में नवसाक्षर बच्चो को अक्षरारम्भ करने की प्रथा प्रचलित है। भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ जाति के लोग अपना आराध्य देव मानते है। इस समुदाय के लोग भगवान चित्रगुप्त को अपना कुल देवता और कुलश्रेष्ठ भी मानते है। सामान्य जानो में ऐसी मान्यता है कि भगवान चित्रगुप्त न्याय और भाग्य के नियंत्रक हैं। जीवमात्र के जीवन भर के कर्मो का लेखा जोखा रखना उनका प्रधान कार्य है। भगवान चित्रगुप्त के बनाये लेखा जोखा के आधार पर मनुष्य को उनके किये कर्मो का फल तय होता है। किसी भी मानव के जीवन में न्याय और भाग्य दोनों की अंतिम आवश्यकता होती है। इसी लिए यह पूजा किसी जाति विशेष की न होकर पूरे मानव जाति की हो जाती है।
अंधराठाढ़ी में चित्रगुप्त पूजा समिति द्वारा वर्षो पूर्व बुद्धसागर लाल पुस्तकालय के नाम से एक पुस्तकालय के निर्माण के लिए जमीन आदि भी लिया गया है। जहां एक कच्चा भवन भी बनाया गया था। परंतु मिट्टी के बने पुराने पुस्तकालय भवन ध्वस्त होने के बाद से नया भवन नही बन सका है। प्राचीन चित्रगुप्त पूजा समिति के अध्यक्ष तुलकान्त लाल दास एवं सार्वजनिक चित्रगुप्त पूजा समिति के अध्यक्ष प्रवीण कर्ण के मुताविक पुस्तकालय के भवन निर्माण के लिए कोशिश की जा रही है। भवन निर्माण के बाद पुस्तकालय परिसर में स्थायी रूप से चित्रगुप्त मंदिर निर्माण कराया जाएगा। बरिष्ट पत्रकार रमेश कर्ण के मुताविक प्रशिद्ध कर्णमृत के रचयिता श्रीधर दास द्वारा यहां के इतिहास प्रसिद्ध कमलादित्य में मंदिर निर्मित है। यहाँ के उत्खनित शिलालेख से प्रतीत होता है कि श्रीधर दास उर्फ श्री धर ठक्कूर राजा नान्य देव के महामंत्री थे। अंधरा ठाढ़ी से कर्ण कायस्थों के प्राचीन काल से ही जुड़ाव का साक्ष्य मिलता रहा है। लोगों का ये भी कहना है कि यहां भगवान चित्रगुप्त महराज के मंदिर के साथ साथ इतिहास पुरुष श्रीधर ठक्कूर का भी मंदिर बनना भी न्यायसंगत होगा।
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