बासोपट्टी से प्रवीण ठाकुर की रिपोर्ट:
मधुबनी: छठ पर्व को लेकर जहाँ युद्धस्तर पर छठ घाटो पर साफ़ सफाई का काम चल रहा है। वहीं बासोपट्टी प्रखंड मुख्यालय से करीब 500 मीटर की दुरी पर बभनदायि पोखरा में मनाये जाने वाला महापर्व छठ पर लग सकता है ग्रहण। बता दे कि यह पोखरा लगभग 52 बीघा में फैला हुआ है। इस पोखरे की एक अलग कहानी है जिसकी वजह से ये पोखरा प्रखंड ही नही लगभग पूरे जिले में प्रसिद्ध है। पोखरा के किनारे किनारे छठ पर्व के लिए घाट का निर्माण किया जाता है। साफ़ सफाई के बाद श्रद्धालु सबसे बड़े पर्व को मानते है लेकीन कुछ महीने पूर्व से चल रहे मछुआ सोसाइटी के पट्टा विवाद के कारण तालाब जलकुम्भी और समाइर से भरा हुआ है। जलकुम्भी और पानी वाले घास के कारण तालाब में आये दिन मछली मर रहा जिससे साँस लेना मुश्किल हो गया है। विवाद के कारण पुलिस के द्वारा दोनों पक्षों के ऊपर धारा 107 लगा दिया गया है। साथ ही उनको तालाब पर जाने से भी रोक दिया गया है जिसके कारण मछुआरों को लाखो का क्षति हो रहा है। इस तरह का विवाद कई गाँवो के तालाबो पर चल रहा है। जिला मत्स्य पदाधिकारी और मछुआ सोसायटी के मंत्री के द्वारा मनमर्जी तरीके और मत्स्य विभाग के निदेशक के आदेश को किनारे करते हुए जलकर बंदोबस्ती रद्द कर दिए जाने से मछुआरों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
नवनिर्वाचित मछुआ सोसाइटी अध्यक्ष कमलेश सहनी ने बताया की प्रखंडस्तरीय पदाधिकारियो से लेकर राज्यस्तरीय पदाधिकारियो को इस धोखाधड़ी के बारे में लिखित शिकायत दिया लेकीन अभी तक किसी ने गरीब मछुआरों के तरफ नहीं देखा और ना ही शिकायत के ऊपर संज्ञान लिया। मछुआरों के साथ साथ स्थानीय लोग मंत्री और जिला मत्स्य पदाधिकारी के ऊपर अभी तक कोई ठोस कारवाई नहीं होने से काफी आक्रोशित है। लोगो का कहना है की इस विवाद के कारन हमें पर्व मनाने में दिक्कत होगी। छठव्रती जो तीन दिनों तक उपवास में रहकर पानी में खड़ी होती है, इस दुर्गन्ध और कचरे के कारण उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पर सकता है। इस मामले को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह से पूछे जाने पर उन्होंने बताया की जिला पदाधिकारी के माध्यम से मत्स्य पदाधिकारी को यहाँ आकर विवाद सुलझाने के लिए सुचना किया गया है, लेकीन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला। पुनः इस मामले पर जिला पदाधिकारी से बात करके विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। बहरहाल देखना यह है की कुम्भकर्णीय नींद में सोये सरकारी सिस्टम आस्था के महापर्व में भी मछुआरों का विवाद सुलझा पाते है या नहीं।



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