मधुबनी: रहिका प्रखंड में ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ
है। नई कड़ी में मनरेगा भवन के निर्माण के निर्माण में अनियमितता की बात
सामने आई है। इसमें विभागीय दिशा निर्देशों का पालन ही नहीं किया गया है।
सूचना
के अधिकार में प्राप्त हुई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक मनरेगा भवन का निर्माण
25 लाख रुपए के तहत होना चाहिए। मगर दिशा-निर्देश के विपरित प्रखंड रहिका
द्वारा 31 लाख 78 हजार रुपए का प्राक्कलन बनाया गया है। जो तय राशि से छह
लाख 78 हजार रुपए अधिक है।
वहीं प्राक्कलन में राशि बढ़ोतरी के लिए
केंद्र सरकार से किसी तरह का आदेश प्राप्त नहीं था। वहीं सवाल उठाया गया है
कि अधिक राशि पंचायत समिति बीआरजीएफ से ली गई है। इस पर कार्यालय का जवाब
था कि जिला के बीआरजीएफ से राशि का स्थानंतरण किया गया है जो जिला
प्राक्कलन के मुताबिक है। हालांकि ऑडिटर ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि यह
भारत सरकार के नियम के विपरीत था।
वहीं सवाल उठाए गए हैं कि जब
कार्य आदेश नहीं था और कार्य प्रारंभ करने की तिथि नहीं दी गई थी फिर भी
वर्ष 2013-14 में काम शुरू किया गया। प्रशासनिक अनुमोदन के मुताबिक काम को
एक साल में पूरा करना था। इसके जवाब में बताया गया कि जिला द्वारा किसी को
भी अभिकर्ता नहीं चुना गया था इसलिए समय सीमा तय नहीं की गई। हालांकि ऑडिटर
ने इस जवाब को भी सिरे से खारिज कर दिया। वहीं इसके निर्माण में जिस
एजेंसी से सामान खरीद के बदले भुगतान किया गया उसपर भी सवाल उठाए गए हैं।
लगभग साढ़े तीन लाख के भुगतान का सामग्री का अभिश्रव और मास्टर रॉल नहीं था।
साथ ही स्वामित्व कर भी नहीं काटा गया है। इस पर कार्यालय का जवाब था कि
अंतिम भुगतान के समय राशि काट ली जाएगी। वहीं बाद में मेसर्स रौशनी
ट्रेडर्स वैशाली को दो लाख और चार लाख का भुगतान किया गया। पर किस बैंक से
किया गया इसे स्पष्ट नहीं किया गया है। वहीं गंभीर सवाल उठाए गए कि 10.78
हजार रुपए का उपयोगिता प्रमाणपत्र दिया गया है। अवशेष राशि को शून्य दिखाया
गया है जबकि 43 हजार रुपए शेष थे। वहीं शेष राशि को सरकार को वापस करनी थी
जो नहीं की गई।
इससे साफ पता चलता है कि योजना में नियमों को ताक पर
रखकर काम किया जा रहा है। और अभी तक मनरेगा भवन अधूरा है। इस बाबत डीडीसी
धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। पूरे मामले की
जांच कराई जाएगी। और दोषियों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

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