पेंटिंग बेचने में किसी बिचौलिये की नहीं होगी जरूरत
मधुबनी : जिले के मिथिला पेंटिंग कलाकारों को अब अपनी बनायी कलाकृति
को बेचने के लिये किसी बिचौलिये की जरूरत नहीं होगी. अब इन कलाकारों को
अपनी कला की पूरी कीमत मिल सकेगी, जो कीमत ये तय करेंगे. वहीं कीमत खरीदार
इनको देकर खरीदेंगे. दरअसल मिथिला पेंटिंग कलाकारों की स्थित को सुधारने और
इस कला को बढ़ावा दिये जाने की दिशा में जिला प्रशासन ने विशेष पहल शुरू
की है. इस पहल के तहत अब जिला प्रशासन के द्वारा विशेष पोर्टल वेबसाइट
तैयार किया जा रहा है. जिसमें राष्ट्रीय स्तर से लेकर आम कलाकार को जोड़ा
जायेगा. इस पोर्टल पर कलाकारों का नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित उनकी बनायी
पेंटिंग का विस्तृत ब्योरा होगा. पेंटिंग की तस्वीर और उसकी वास्तविक कीमत
का टैग लगा तस्वीर पोर्टल पर अपलोड किया जायेगा.
*बनेगी अपनी पहचान : जिला पदाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक ने बताया है कि
कलाकारों के लिये पोर्टल वेबसाइट बनाने के पीछे एक साथ कई मंशा है. सबसे
अहम तो यह कि इस पेशे में कलाकारों का कथित तौर पर बिचौलिये के द्वारा किया
जा रहा शोषण समाप्त हो जायेगा. जब पेंटिंग की कीमत उसके साथ टैग होगा तो
खरीदार वही कीमत देगा. वहीं बाहरी खरीदार सीधे तौर पर कलाकारों से संपर्क
में आ जायेंगे. उन्हें जो पेंटिंग पसंद होगी वे उस पेंटिंग के कलाकार को
नंबर के जरिये या फिर पता पर संपर्क कर उनसे पेंटिंग की खरीद कर सकेंगे.
*सरकारी स्तर पर कलाकारों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
मिथिला पेंटिंग की कला नयी पीढ़ी को भी मिले इस दिशा में भी सरकार ने
पहल शुरू कर दी है. सरकारी स्तर पर अब मिथिला पेंटिंग का प्रशिक्षण दिया जा
रहा है. भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के द्वारा जिलवारपुर गांव में
गुरु शिष्य परंपरा की शुरुआत की गयी है. इस अभियान के तहत पहले चरण में 15
महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है. ट्रेनर को 25 हजार रुपये मासिक
मानदेय का भुगतान सरकार कर रही है तो दूसरी ओर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले
कलाकारों को प्रति दिन 300 रुपये की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है.
इस अभियान में ट्रेनर के रूप में राज्य पुरस्कार प्राप्त महामाया देवी हैं.
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