मधुबनी: वर्ष
भर चार नवरात्र में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व रहा है। इन दिनों
प्राकृति से विशेष तरह की शक्ति निकलती है, इस शक्ति को ग्रहण करने के लिए
शक्ति पूजा या नवदुर्गा पूजा का विधान है । चैत्र नवरात्र से ही विक्रम
संवत की शुरुआत होती है। चैत्र शुक्ल पक्ष मे मनाये जाने वाले नवरात्र
आत्मशुद्धि और मोक्ष के लिए बहुत उपयुक्त है । ज्योतिष पंकज कुमार झा
शास्त्री ने बताया कि अध्यात्म के दृष्टि से प्रकृति और पुरुष संयोग का समय
भी माना गया है। माना जाता है कि श्री राम भगवान का जन्म भी चैत्र नवरात्र
मे ही हुआ है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र मे माता दुर्गा का आगमन गज (हाथी) पर
हो रहा है और प्रस्थान भैंसा पर है। आगमन और प्रस्थान के फलादेश में
विद्वानों का एक मत नहीं है । वैसे अधिकतर विद्वान मानते हैं कि माता का
गज पर आगमन शुभ है और भैंसा पर प्रस्थान अशुभ का संकेत है। ममता मयी, करूणा
मयी, दया मयी तो माँ है। हम सभी को स्वच्छ और निष्ठा पूर्वक माता दुर्गा
के नौ रूपों का ध्यान और पूजा-पाठ करना चाहिए । यह ऐसा समय होता है जब हम
नौ ग्रहों को अपने अनुकूल कर सकते है।
घट स्थापना के शुभ मुहूर्त-
18/3/2018 शुक्ल पक्ष, दिन रविवार
समय- प्रात: 6:31 बजे से 7:46 बजे तक।
कुल मिलाकर एक घंटा पन्द्रह मिनट।
वैसे समय अभाव में इस दिन घट स्थापना कभी भी कर सकते है।
प्रतिपदा तिथ आरंभ 17/3/2018 दिन शनिवार, रा 6:27:38 बजे से 18/3/2018 दिन रविवार, रा 6:30:14 बजे तक। 26/3/2018 दिन सोमवार को, विजया दशमी है।
घट स्थापना के शुभ मुहूर्त-
18/3/2018 शुक्ल पक्ष, दिन रविवार
समय- प्रात: 6:31 बजे से 7:46 बजे तक।
कुल मिलाकर एक घंटा पन्द्रह मिनट।
वैसे समय अभाव में इस दिन घट स्थापना कभी भी कर सकते है।
प्रतिपदा तिथ आरंभ 17/3/2018 दिन शनिवार, रा 6:27:38 बजे से 18/3/2018 दिन रविवार, रा 6:30:14 बजे तक। 26/3/2018 दिन सोमवार को, विजया दशमी है।


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